जहां नहीं है कोई
जहां नहीं है कोई
जहां नहीं है कोई दम
वहां दिखाते हैं दम खम
जहां सोते हुए हैं जन
वहां लूटाते हैं सब धन !
ज़िन्दा होना ही नहीं सब
ज़िन्दगी दिखती है जो तब
लूटा दो सब अगर चाहो
मिलेगा सबका बराबर मन !
समझ आये नहीं तुमको
सुनते भी नहीं हो तुम
अहंकार हर तरफ है ऐसे
जैसे मांते नागिन का फन !
हो चुका अब बांटाधार
सो चुका धैर्य का सार
ये जीवन हुआ अब ब्यर्थ
मिले ना मिले फिर मानव तन !
