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Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Classics

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Shailendra Kumar Shukla, FRSC

Classics

जहां नहीं है कोई

जहां नहीं है कोई

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जहां नहीं है कोई दम 

वहां दिखाते हैं दम खम 

जहां सोते हुए हैं जन 

वहां लूटाते हैं सब धन !


ज़िन्दा होना ही नहीं सब 

ज़िन्दगी दिखती है जो तब 

लूटा दो सब अगर चाहो 

मिलेगा सबका बराबर मन !


समझ आये नहीं तुमको 

सुनते भी नहीं हो तुम 

अहंकार हर तरफ है ऐसे 

जैसे मांते नागिन का फन !


हो चुका अब बांटाधार 

सो चुका धैर्य का सार 

ये जीवन हुआ अब ब्यर्थ 

मिले ना मिले फिर मानव तन !


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