STORYMIRROR

Tanha Shayar Hu Yash

Romance

4  

Tanha Shayar Hu Yash

Romance

जब से ये पीना छूट गया

जब से ये पीना छूट गया

1 min
401

जब से ये पीना छूट गया है, तन्हा

महफिलों से रिश्ता टूट गया है।


हर कोई खाकेँ मुझमे, और मैं जाम में

भरे नशों से खली रिश्ता छूट गया है।

जब से ये पीना छूट गया है।   


सब झुकाते है सर और बढ़ाते है हाथ

और रात के दूसरे पहर से रिश्ता टूट गया है। 

जब से ये पीना छूट गया है।   


पूछ कर हाल निकल जाते है पतली गली,

जैसे मखमली चांदनी आँचल कोई लूट गया है।

जब से ये पीना छूट गया है।   


अब सोच समझ के कीड़े खुदखुदाते हैं

दक्यानुसी बातों से हर नाता टूट गया है। 

जब से ये पीना छूट गया है।   


सब लगते है अब सागर की मछली से,

और मैं किनारों पड़ा "तनहा" नमक श्वेत सा।

अब ऐसा लगता है सबकी अठखेली देखता हूँ

रहता जैसे देखूं मैं कठपुतलीयो के खेल सा।


जब से ये पीना छूट गया है, तन्हा

महफिलों से रिश्ता टूट गया है। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance