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Jashanpreet kaur

Romance Classics Fantasy

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Jashanpreet kaur

Romance Classics Fantasy

जब कान्हा जी बाँसुरी बजावे

जब कान्हा जी बाँसुरी बजावे

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जब कान्हा जी बाँसुरी बजावे, 

मधुर आवाज़ कण कण बसजावे।


मोर अपने पंख फलावे, 

कोयल अपना राग सुनावे।


राधा जी जब नाचे, 

बाँसुरी ओर प्यारी लागे।


घास हरा-भरा मीठा भावे, 

गइयाँ भी खुश हो जावे।


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