इतनी जल्दी मैं बूढ़ा हो गया
इतनी जल्दी मैं बूढ़ा हो गया
इतनी जल्दी मैं बूढ़ा हो गया,
अभी शाम ढली भी नहीं,
कि जीवन में अंधेरा हो गया।
इतनी जल्दी मैं बूढ़ा हो गया।
20 साल गुजरे, मेरे जीवन के
एक अध्याय को खत्म हुए,
और दुसरे को शुरू हुए।
अभी तो मैं शायद, तिनके बटोर रहा था,
कुनबा बसाने को,
पर खेल ही बदल गया।
शायद, जल्दी मैं बूढ़ा हो गया,
तराजू में, तौलती हैं सारी चीजें,
मोल भाव होती हैं सारी चीजें।
मैं सबकी खुशियों पर लूट रहा था,
कोई मुझे बेच गया।
इतनी जल्दी मैं बूढ़ा हो गया,
लोगों की आस, पानी सा साफ है।
उनकी आँखों मे, उनके माँगो के ख्वाब है।
उन ख्वाबों को पूरा करने मे,
मैं उलझ कर रह गया।
इतनी जल्दी मैं बूढ़ा हो गया!
