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Dineshkumar Singh

Abstract

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Dineshkumar Singh

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रिश्तों की दीवार

रिश्तों की दीवार

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रिश्तों की दीवार 

को लेकर कई बार 

ऐसा होता है

रिश्ते महसूस नहीं होते, पर

दीवार का सामना

हर बार होता है।

रिश्तों की दीवार ...


परिवार के बीच सब खुद को

सुरक्षित पाते हैं।।2।।

पर इसी घेरे के बीच,

कई बार दरार पनप जाते हैं।

बढ़ते वक़्त के साथ,

ये दरार वो घेरा तोड़

देता है।

रिश्तों की दीवार ...


प्रेम की गीली मिट्टी से बनता है

हर कुनबा।।2।।

किसी के त्याग, बलिदान और परिश्रम से 

जुड़ता है ये कुनबा।

इसलिए तोड़ने वाले से ज्यादा,

बनाने वाला खास होता है।।

रिश्तों की दीवार ...


जब दीवार या दरार, बड़ी हो जाए,

तब भी आप ना घबराये।

हौसला रखें, धीरज ना खोये।

समय के पास ऐसी मुसीबतों

का इलाज कई बार होता है।।

रिश्तों की दीवार ...


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