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ritesh deo

Romance

4  

ritesh deo

Romance

इतना यकीन क्यों है

इतना यकीन क्यों है

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तुम्हे इतना यकीन क्यों है

कि मैं हमेशा तुम्हारा ही रहूंगा

तुम्हारी उपेक्षा, तुम्हारी अवहेलना से में दूर नही चला जाऊंगा   

ऐसा यकी तुम्हे क्यों है

तुम्हे क्यों लगता है,कि मैं टूट नही सकता

तुम्हे क्यू लगता है कि मैं बिखर नही सकता

तुम्हे क्यों लगता है कि मैं चलता रहूंगा दृणता से हमेशा

और नही थकूंगा कभी।

तुम्हे क्यों लगता है कि सदियों तक जगता रहूंगा,मैं

नींद भी आ सकती है मुझको भी।

क्या तुम यही चाहती हो कि मुझसे हो कोई गलती

और तुम मुझे उलाहना देती हुई

दामन छुडा लो अपना।

क्या इतना भी बोझ हूँ 

मैं तुम पर

यदि हाँ तो एक बार तो कह कर देखो

हट जाऊंगा मैं तुम्हारी राह से

हमेशा के लिए।

लेकिन सोच लो सौं बार यह करने से पहले

एक बार गया तो फिर दुबारा न आऊंगा

और सदियों2 मुझसा न पाओगी कहीं।

आज अपने उन्माद में,जवानी के जोश में,खयाली दुनिया के भुलावों में रहने के कारण मेरेपन को ठुकरा रही हो

कल मेरे जैसे की वफ़ाएँ इस जहां में

कहीं नही पाओगी।

जब उतर जाएगा नदी का वेग

तो बहुत ही पछताओगी

पहचान लो मुझको और खुद को भी

और दामन पकड़कर रोक लो मुझे

भर लो अपने आगोश में

और जी भर कर प्यार कर लो मुझे।

क्योंकि जिंदगी में प्यार करने के मौके काम ही मिलते हैं

इस जीवन के वीरां गुलिस्ता में

खुशियों के चमन कम ही खिलते हैं।

वक़्त का सम्मान करो और

मुझे प्यार करो

प्रेम की इस वीणा में

सुर के नए तान भरो।

अपने भीतर खोजो

मैं ही मिलूंगा

जब भी रिसेंगे घाव,तेरे मन के

उन्हें मैं ही सिलूँगा।

अब तेरी मर्जी पे बात ठहरी है

चाहे जिंदा रख चाहे ,मार दे

 चाहे अपने दिल मे छुपा के स्वर्गिक आनंद से भर दे मुझे

चाहे कर के तिरस्कृत

 नर्क के समंदर में उतार दे।  



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