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AMIT KUMAR

Abstract Fantasy Inspirational


4.2  

AMIT KUMAR

Abstract Fantasy Inspirational


इसमें क्या है ?

इसमें क्या है ?

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सभी तो बाहर बैठे है, अंदर क्या है,

नदिया से पूछ रहे हो समंदर क्या है

खुदगर्जी हावी हो गयी सपनो की खातिर

अपने भी छूटे, कहते हो इसमें क्या है!


आगे बढ़ने के चक्कर मे पीछे देखा नहीं,

मां बाप ने खुद को कहा इसमें क्या है,

ज़िन्दगी संवर जाए बच्चे की बस,

हम अकेले ही अच्छे है, इसमें क्या है!


तुम काफी दूर निकल गए हो कहीं,

उन बूढ़ी आंखों से अब नहीं दिखता,

सब दुखों को सहन करके भी खुश हैं

फिर भी आस है आओगे, इसमें क्या है।


तुम्हारे सपनो के लिए खुद को खाक किया,

तुम्हारे पंखों को संवारा, खुद का काट दिया,

उनकी जान हो हमेशा की तरह अब भी,

फिर भी नहीं समझते हो इसमें क्या है !


उनकी दुआओं का ही असर है,

कि हर हवा दूर रही तुमसे ताउम्र,

आज भी तुम्हारे लिए सजदा करते हैं,

तुम कुछ न करो, इसमें क्या है !


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