इश्क़ तो नहीं है मुझे तुमसे
इश्क़ तो नहीं है मुझे तुमसे
इश्क़ तो नहीं है मुझे तुमसे ..
पर तेरी फ़िक्र अक्सर..
मुझे सताती है ।
तेरे दीदार के बिना ऑखें भी..
नम हो जातीं हैं ।।
तुम्हें हासिल करने की..
हसरत भी नहीं ,
फिर भी तुम्हें कोई और चाहे तो ..
इस दिल पर क़यामत आ जाती है ।
पर हॉ इश्क़ नहीं है मुझे तुमसे ,
फिर भी तुम्हें सोचकर ही ..
ऑखों में नमी छा जाती है।।
एक अनोख़ा सा रिश्ता है तुमसे..
जो किसी और से नहीं ।
जो सुकून मिलता तुझसे इस दिल को..
वो किसी और से नहीं ।।
पर हॉ इश्क़ नहीं है तुमसे ,
बस तेरी फ़िक्र मुझे..
हर पल सताती है ।।

