इश्क
इश्क
वह मुस्कुराकर
कत्ल करते हैं और
हमारी नादानी तो देखो
हम उसे हर बार
इश्क समझने की गलती कर
बैठते हैं
यह एक तरफा इश्क
देखा जाये
तो बस
दर्द ही देता है
लेकिन जिस्म से
उस दिल को बाहर
कहां निकालकर
फेंक दें
जिसमें जब देखो
हर समय
मोहब्बत का दरिया ही
बहता रहता है
इश्क लहू बनकर
मेरी नस नस में
मेरी रगों में तो
कम से कम न दौड़े
ऐसा क्या उपाय करें
इसे एक कांच के गिलास में
बंद करके
हवाओं से जुदा करके
इसपर कसकर एक ढक्कन
लगाकर
इसे जिस्म के किसी महफूज
कोने में बने
कैदखाने में
इसकी जिन्दगी की
आखिरी सांस तक
कैद कर दें।

