STORYMIRROR

Minal Aggarwal

Romance

4  

Minal Aggarwal

Romance

इश्क

इश्क

1 min
202

वह मुस्कुराकर 

कत्ल करते हैं और 

हमारी नादानी तो देखो 

हम उसे हर बार 

इश्क समझने की गलती कर 

बैठते हैं 

यह एक तरफा इश्क

देखा जाये

तो बस 

दर्द ही देता है 

लेकिन जिस्म से 

उस दिल को बाहर 

कहां निकालकर 

फेंक दें 

जिसमें जब देखो 

हर समय 

मोहब्बत का दरिया ही 

बहता रहता है

इश्क लहू बनकर 

मेरी नस नस में 

मेरी रगों में तो 

कम से कम न दौड़े 

ऐसा क्या उपाय करें 

इसे एक कांच के गिलास में 

बंद करके 

हवाओं से जुदा करके 

इसपर कसकर एक ढक्कन 

लगाकर 

इसे जिस्म के किसी महफूज 

कोने में बने 

कैदखाने में 

इसकी जिन्दगी की 

आखिरी सांस तक 

कैद कर दें।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance