Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Nidhi 'Vrishti'

Romance


2  

Nidhi 'Vrishti'

Romance


इश्क

इश्क

1 min 341 1 min 341

सावन सामने बरसा मगर 

प्यास दिल की तो बुझाया भी नहीं 

वो ऐसा बादल है कि जिसका 

कोई साया भी नहीं।

 

क्यूँ हो गयी खफा

बिन बात ही बदली 

यहीं बरसे और

दामन को भिगाया भी नहीं।


तेरी आँखों ने बहुत कुछ कहा हमसे 

पास तूने मगर बुलाया तो नहींं 

ना जाने क्यों तेरी

यादों के साथ याद आता है

वो नगमा जो कभी तूने सुनाया भी नहीं।


हम तो शायर थे

फिर भी दिले आरजु को, 

कभी लफ्ज़ों में फरमाया भी नहीं

वो तो कुछ खास थे ऐसे 

कि इश्क भी किया और जताया भी नहीं।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Nidhi 'Vrishti'

Similar hindi poem from Romance