Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Nidhi 'Vrishti'

Abstract

4.5  

Nidhi 'Vrishti'

Abstract

हम लिख देते हैं जाने क्यों

हम लिख देते हैं जाने क्यों

1 min
364


हम लिख देते हैं जाने क्यों

हर शख्स को अपनी बातों में

कुछ अनसुलझी मुलाकातों के

हर पल अपने जज्बातों में।


एक बार जो कागज़ पर बिखरे

वो पल स्याही की बूंदों से

दिल के कोने से फिसल गए 

जैसे सपने गहरी नींदों के।


वो बातें जो न कही गई 

बेमतलब के अलफाज़ों में 

अब भी यादें ताज़ा करती हैं

कुछ पहचानी सी साज़ों में।


वो अब भी उठाया करती हैं

आधे चाँद की रातों में

कुछ कहा सुनाया करती हैं

खट्टी मीठी सी बातों में।


वो दर्द जगाया करती हैं

उन पर भी कुछ लिख जाने को

हर बार ही कुछ बच जाता है

उस चँदा को बतलाने के।


मेरे गम सारे बह जाते हैं 

दो बूँद कलम की स्याही मेंं

कुछ खुशियाँ मुझे बहलाती हैं 

स्याह रात की प्याली में।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract