An anonymous writer, college student, hidden behind a pen name, searching for life and love and some rhyming words.
कुछ खुशियाँ मुझे बहलाती हैं स्याह रात की प्याली में। कुछ खुशियाँ मुझे बहलाती हैं स्याह रात की प्याली में।
हम तो शायर थे फिर भी दिले आरजु को, कभी लफ्ज़ों में फरमाया भी नहीं वो तो कुछ खास थे ऐसे ... हम तो शायर थे फिर भी दिले आरजु को, कभी लफ्ज़ों में फरमाया भी नहीं वो ...
जब ज़िन्दगी से घबराकर, तेरे कंधे पे रोती हूँ मेरे हर बड़े किस्से को, अपने उस एक किस्से का ... जब ज़िन्दगी से घबराकर, तेरे कंधे पे रोती हूँ मेरे हर बड़े किस्से को, अपन...
वो तितलियों के साथ पल-पल मचलती भी मैं वो उस खुदा की नायाब गलती भी मैं। वो तितलियों के साथ पल-पल मचलती भी मैं वो उस खुदा की नायाब गलती भी मैं।