STORYMIRROR

Alok Singh

Romance

4  

Alok Singh

Romance

इश्क से इश्क तक

इश्क से इश्क तक

1 min
639

तुम हुशन में लाजवाब हो 

कोई चमकता आफताब हो 

हो तराशी सी कोई मूरत 


तुम कामदेव का बाण हो  

तुम ख्वाब हो मेरे प्यार का 

तुम शराब हो मेरी प्यास का 

तुम अंगूर का हो पानी जी 


तुम हो दहकता विचार सा 

तुम सर से लेकर पैर तक 

सिर्फ हुशन हो सिर्फ इश्क हो 

तुम हो प्यार की प्रकाष्ठा 

तुम काम की हो नयी गज़ल 


मैं मचलता हूँ तुम्हें पाने को 

भर बाहों में बहक जाने को 

है ख्वाब लाली हटाने को 

तुम्हे रोम रोम रिझाने को 


कभी मिलों तो प्यास कम भी हो 

इश्क में कोई रंज न हो 

तुम मुझमें  तो घुलो कभी 

तुम मुझमें तो खुलो कभी 

पार हो इश्क की हदें कभी 

क्या सोचना कि क्या सही 


एक ख्वाब हो  सुबह का तुम

मेरे उखडी सांसों का पता हो तुम 

मैं दरियां हूँ बिन दिशाओं का 

मेरी मंजिल का पता हो तुम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance