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Praveen Gola

Romance

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Praveen Gola

Romance

इश्क~ए~संगम

इश्क~ए~संगम

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कितना वक्त बीत गया ना ?

हमे साथ गुजारे हुए,

अपना वक्त अब चला गया,

साथ वो लमहे गुजारे हुए।


दोनो को बेचैनी अब भी है,

वही कसक, वही दर्द,

यही तो ईश्क है,

जिसकी हवाएँ सर्द।


तुम बुलाते हो अक्सर,

मैं आ नही पाती,

कुछ वक्त, कुछ तेरी बेरुखी,

हर पल दिल में समाती।


सोचती हूँ तुझे जाने दूँ,

फिर लगता है क्यूँ ?

जब हम दोनो हैं सही,

फिर क्यूँ ना दोबारा मिलूँ ?


मैं वादा करती हूँ तुझसे,

वहीं फिर से मिलने का,

साथ वो वक्त था गुजारा,

जहाँ हमने अपने जीने का।


हम मिले, दिल धड़के,

सब वही फिर से होने लगा,

वक्त भी तब थम गया,

जब इश्क ~ए ~ संगम

मुमकिन हुआ।


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