STORYMIRROR

Rishabh Tomar

Romance

2  

Rishabh Tomar

Romance

इंतज़ार

इंतज़ार

1 min
143

पानी व मीन जैसा है अपना नेह प्रियवर,

तेरी कल्पनाओं का है ह्रदय में गेह प्रियवर,

तेरे इंतज़ार में जान बतलाऊँ तुमको कैसे,

निष्प्राण हो गई है तुम बिन ये देह प्रियवर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance