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Jain Sahab

Abstract Fantasy Others

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Jain Sahab

Abstract Fantasy Others

इन्द्रधनुष

इन्द्रधनुष

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नील गगन के सर्वोच्च शिखर पर

आसमान के विशाल पथ पर 

सतरंगी वह नभ में विस्तृत

कुदरत से अद्भुत वह चमत्कृत।


अंतहीन है उसकी काया

नभ पर मनमोहक वह छाया 

नील, पीत रंगों से सज्जित

मुस्काते वृक्षों सा हर्षित

आसमान हुआ अति प्रफुल्लित।


रंगों का अद्भुत संसार

धनुष समान उसका आकार 

दूर हैं जिससे समस्त राग व विकार।


चंद क्षणों का जिसका खेल,

रंगों का अद्वितीय मेल,

आकाश में जैसे दौड़ती रेल।


वर्षा व सूरज का अनोखा बिंब,

अनोखा कोई जादुई जिन्न।

प्रकृति की अद्भुत यह कला,

देख मुस्काती जिसे हर बला।

मन मोह लेना जिसका काम,

इन्द्रधनुष है उसका नाम।



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