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Jain Sahab

Others

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Jain Sahab

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खोज

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दुनिया की चीत्कार में अपनों की पुकार सुन रही हूँ 

भीड़ की हाहाकार में सुख की मुस्कान चुन रही हूँ 

गैरों से कर तो लेते हैं मतलब की बातें, जज्बातों की जुबान ढूंढ रही हूँ 

कुछ सपने गुम थे जो उत्तरदायित्व के दरमियान 

आज फिर वो अपनी पहचान ढूंढ रहे हैं।

खोए हुए से अहसास अपनी जुबान ढूंढ रहे हैं।

हर सफर को तलाश अब सिर्फ मंजिल की नहीं ,

 कुछ को ख्वाहिश बस हमराह की है। 


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