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VINOD PANWAR पंवार_विनोद

Inspirational

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VINOD PANWAR पंवार_विनोद

Inspirational

इंडियन आर्मी जिंदाबाद

इंडियन आर्मी जिंदाबाद

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जन गण मन की शान बढ़ाने

खड़े है सीमा पर छतरी ताने

गए है सरहद पर जवान

मौत है जिन पर मेहरबान

झुलसती गर्मी हो या सर्दी

ओढ़े रहते है बस इक वर्दी

वहां रतजगा हर रात है होता

जिससे देश फिर चैन से सोता

कभी आँसू भी देते है दिखाई

जब सुनी रह जाती है कलाई

माँ से मिले भी कई दिन गुज़रे

आई है चिट्ठी फिर भी ना बिखरे

अबकी होली तो आजा बेटा

चेहरा तो अपना दिखाजा बेटा

अबकी बार माँ पक्का आऊंगा

वादा मेरा जो मैं निभाउंगा

छुट्टी मिली मुझको तो अकेला

वरना संग तिरंगा ले आउंगा

आखिरी शब्द लिख चिट्ठी पूरी करता हूँ माँ

मैं इस मिट्टी से बहुत प्यार करता हूँ माँ

मर भी जाऊँ तो अफसोस ना करना

किसी पे मेरी मौत का दोष ना धरना

तेरा बेटा वीर वीर की तरह जिया है

तेरी छाती से ज्यादा धरती का दूध पिया है

मौका मिला तो मेरे सारे फर्ज़ निभा दूँगा

धरती के जितने कर्ज मुझ पर सारे चुका दूँगा

और वो पागल जो मेरा इंतज़ार करती है

सहमी सहमी सी जो मुझसे प्यार करती है

उसको मत बताना कि सरहद पर जंग है

बस इतना कहना सारा देश मेरे संग है

पापा चाचा आप भी अपने सीने चौड़े रखना

कुछ लकड़ियाँ मेरे लिए पहले ही जोड़े रखना

लिपट आऊ तिरंगें से तो घबरा न जाना

रस्मों-रिवाज संस्कार की अच्छे से निभाना

मेरा नाम भी पन्नों में नाम बनकर रह जाएगा

अगर आप भी टूट गए फिर कौन मुझे 'शहीद' बताएगा


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