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Manoj Kumar

Romance Thriller Others

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Manoj Kumar

Romance Thriller Others

इक गली में जाना

इक गली में जाना

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बहुत दिनों बाद चले थे,

दो कदम आगे...

वो नुक्कड़ मुझे मालूम नहीं थे

इक गली की खबर...

इक गली में बिताने चल पड़ा...


उसकी सड़क की ईंट

आज भी याद हैं मुझे

जबाँ सिल गए थे...

नंगे पाँव के... उसकी याद में


देखा हालत... दर्द भूलकर

वो चेहरे याद आए...

जो बरसों से आँचल से बंधे थे

उसकी पड़ोस वाली फसलें...

उसमें भी खोए

हर नफस उसके लिए

उसके हर नसों के लिए


जो खैरात में दर्द दे रहा था

वो यूँ ही आ के...मेरे माथे पे बोसा किए

मुझे गले से लगाया...

वो अपनी ख़ामोशी से... इशारों से

बहुत ही समझाएँ...

मैं जुदा नहीं हूँ

न तुम जुदा हो..

न अपनी रातें मुर्दा है.. न तारे

न ये सूरज मुर्दा है.. न महताब

सब गवाह हैं अपने- अपने

तुमसे कल भी प्यार करती थी

ओर आज भी करती हूँ...!!



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