हुश्न मस्ताना
हुश्न मस्ताना
बहारों का आशिक मैं
तू ख्वाबों कि तूँ है
शहजादी तेरे आने से
होता है बहार का आना।।
तेरे दीदार से
सांसो कि गर्मी
तेरे जाने से धड़कनों
का रुक जाना।!
शायरी शायर कि
गीतों का है तूँ तराना
तेरे नाज़ों सजो से गीत
संगीत बहाना!!
तेरी मुस्कान है
जैसे कली नाजुक का
मुस्कुराना!!
जिंदगी जान जानम तू
सरगम कि सहेली
जिंदगी का अफ़साना।।
हसरत कि पहेली
तेरा आना चाँद
चांदनी का आना!!
हवाओं में तेरी उड़ती
जुल्फे चाँद से चेहरे का
चिलमन नजराना!!
तू झील कि कमल
तेरी आँखों का काजल
घटाओं सा बादल।
तेरी तिरछी नज़रों का
इशारा दीवानो का
तेरी अदाओं पे
मिट जाना।।
तेरे माथे पे चमकती
बिंदियाँ तेरे कानो कि
बाली हुश्न का अंदाज़
आशिकाना।।
तू शोला है सबनम है
तेरी जुल्फों के साये में
तेरे चेहरे का छुप जाना
सावन कि घटा जैसे
चांदनी चाँद का शर्माना!!
सावन कि घटाओं का
बिन सावन छा जाना ।।
छम छम खनकती
तेरी पायल दीवानो को
कर देती है घायल
दीवानों का परवानो
सा मिट जाना।।
तू सागर है मोहब्बत कि
जिंदगी के किनारों कि
परवानो कि मस्ती है
तेरी चाहत में डूब जाना।।
तू तकसीम नहीं फिरकों में
तू बँटी कटी नहीं टुकड़ो में
तू वाहिद मोहब्बत
पाक पाकीजा जाने जाना!!
तू खुदाई शान है
अरमा ईमान जहाँ में
इबादत अकिकद
इश्क इज़हार
हुश्न है मस्ताना।।
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!

