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Ramashankar Yadav

Romance

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Ramashankar Yadav

Romance

हरजाई

हरजाई

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जिनको दिल के मंदिर में भगवान बनाए बैठे थे

जिनसे हम जीवन भर के सारे अरमान लगाए बैठे थे,

मिटाने को मेरी हस्ती वो खुद सामान सजाए बैठे थे।

सोचा था हम तुम होंगे इस दिल के नए जहाँ में

मालूम न था कि मौत को हम मेहमान बनाए बैठे थे,

दुश्मन दिल के अरमानों को अरमान बनाए बैठे थे

नाँदां थे हरजाई को दिलोजान बनाए बैठे थे।



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