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Rohtash Verma ' मुसाफ़िर '

Abstract

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Rohtash Verma ' मुसाफ़िर '

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होली के बहाने

होली के बहाने

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होली एक रंग है पत्थर के बहाने

होली का रंग भला पत्थर क्या जाने!

बाहर भीतर

इस तन उस तन

चेहरे पर गुलाल लगा मंद से मुस्कानें

पत्थर क्या जाने?


होली एक बंधन है भंवर के बहाने

होली का बंधन भला भंवर क्या जाने!

बाहर भीतर

इस मन उस मन

बिना द्वेष के मिलन कर माने

भंवर क्या जाने?


होली एक खेल है बच्चों के बहाने

बाहर भीतर

इस घर उस घर

सब मन एक कर देने के माने

बच्चा ही जानें!!



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