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Rishab K.

Abstract Classics Inspirational

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Rishab K.

Abstract Classics Inspirational

होली आयी

होली आयी

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माँ ने बताया था- जो हो ली वो होली !

इक इशारा दिया था रोना नहीं दुःख में,

आँसू को पीना नहीं, जो सूख गया गाल पर,

वही मोती बनेगा। 


याद दिलाएगा आज का दिन जब हिम्मत की थी---

बिन बोले सब बतलाने की----

राह में आयी हर मुश्किल का 

मुँहतोड़ जवाब देने की। 


होली...............

ये होली आग की, ये होली रंग की 

और ठंडे ठंडे पानी की,

सबसे अच्छी होली है आग की--

जला देती है हर बुराई को,

ना मन मैला ना तन, गरमाइश रिश्तों की, 

फ़रमाइश प्यार की। 


हर दिन एक सा नहीं होता,एक साल लग जाता है 

मन रंगने,तन रंगने में....

मीठा फल देने में पेड़ भी समय लेता है ।


होली.......रंगों की .........

लाल,पीले,हरे,गुलाबी रंगों की होली…

भूमि से भूमि पर वार करने वाली मिसाइल से 

अच्छी है पिचकारी

दो पल में रंग दे दो दिलों को प्यार के एक रंग में,

वो हीरे, वो मोती, वो गहने,वो जवाहरात.......

जो ना कर पाएँ, वो ये कर दे..भिगो दे तन मन 


एक हो जाएँ प्यार के रंग में रंग कर 

भूमि से भूमि पर मार करने वाली

मिसाइल क्या जाने--इसकी ताक़त को,

वो मारना जानती है! जिलाना नहीं

लाल पीले नीले रंग जब उड़ें हवा में 

बादलों की छटा को बदल दें। 


जवान हो ख़ून से लथपथ, खेलता वो भी होली है 

ये रंगों की वो ख़ून की होली है,

चंद सिक्कों के लिए देश को बेचने वालों 

अब आयी फिर होली है...... जो हो ली वो हो ली !


अब रंग लो मन को देश प्रेम के रंग में ! और कह दो

इस साल हमने भी जी भर के--खेली होली है !


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