STORYMIRROR

शालिनी मोहन

Romance

4  

शालिनी मोहन

Romance

हमसफ़र

हमसफ़र

1 min
340


चाँद फिसल रहा बादल में

पत्तों की सरसराहट ने

राग नया छेड़ दिया

धाराओं की बलखाती चाल पर

हवाओं ने है डेरा डाल लिया


तुम आईना

परछाई भी

सुबह के सूरज

रात के चाँद भी

बारिश की छींक

सर्दी की धूप भी

नींद में 

एक ख़्वाब

पलकों पर सजे

श्रृंगार भी

आँचल के कोर

रेशम की डोर भी


हर रंग के

एक चित्र

हर मौसम में

एक मित्र तुम

अहसास में 

एक बोल

बहुत शोर में

एक आवाज़ तुम

सपनों के शुरूआत

ख़्वाहिशों की बुनियाद तुम

दिल की गहराई से

आकाश तक

एक ऊँचाई तुम


लिखती हूँ

तुम्हारी कलम से

कुछ किस्सें

कभी नगमें

तुम खुशी की

फसल काटो

मैं गम़ के 

बीज रख लूँगी


तुम्हारी आँखों की

बहुत रौशनी को

सजाती.....सवाँरती.....मैं....



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance