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Vaishnavi Mohan Puranik

Romance

3  

Vaishnavi Mohan Puranik

Romance

हमदम मेरे

हमदम मेरे

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आँखों से गुम हो जाए सपने बेगाने लगने लगे सब अपने ।

उलझने भरी हो मन में 

कुछ खालीपन सा जीवन में ।

थामे रखना मेरा हाथ 

हमदम मेरे देना तुम साथ ।।


कहती नहीं मैं कोई कहानी 

मैं तो हूं बस बहता पानी ।

होंठों पे मेरे इतनी आस 

रहना हरदम मेरे पास ।

जीत मेरी बन जाए मात 

हमदम मेरे देना तुम साथ ।।


कैसे कहूं क्या हाल तेरे बिन 

काटे नहीं कटते अब ये दिन।

बीच राह में छोड़ न जाना

 मुझसे अपना मुंह मोड़ न जाना।

सुबह मेरी जब बन जाए रात 

हमदम मेरे देना तुम साथ ।


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