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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

// हमारे प्यारे बुजुर्ग दादाजी //

// हमारे प्यारे बुजुर्ग दादाजी //

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उनके हाथों की लकीरों में वो " संघर्ष " की कहानी है,

चेहरे की झुर्रियों में वो " अनुभव " की निशानी है ।

जिन्होंने देखा है अपने ज़माने का वो हर रंग,

वही है जीवन के असली आनंद का संग ।


चलते वक्त से " सफर " तो उनका आगे का है

हर बात में उनकी " सच्चाई " का वो अक्स उभरता है,

ज्यों चाँद का असर ।

खामोश रहते हैं, पर दिल में " ज्ञान " का समंदर है,


उनकी सलाहों में " जिंदगी " का असल वो सिकंदर है।

वो न हों तो घर वीरान सा अब लगता है,

उनकी मौजूदगी में हर कोना अब भी " महकता " है ।

 इस " परिवार " की धरोहर उनसे ही तो है 


 हमारा असली " जोहर " तो हमारे प्यारे बुजुर्ग दादाजी हैं

हरेली तिहार से एक दिन पहले 

मैंने अपने घर के सबसे बड़े 

बुजुर्ग यानी दादाजी को खोया है...


जो मेरी हर " सोच " और " सपने " ,आदि का हिस्सा थे


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