हम तुम
हम तुम
चलो आज इक ऐसी जगह चलते हैं
जहाँ पर सिर्फ और सिर्फ हम तुम हों,
खुशियों का फैला जहां दामन हो
प्यार की खुशबू से महकता चमन हो
दूर दूर तक कहीं न कोई गम हो!
जहाँ बस तनहाई हो और हम तुम हों।
परवाह बहुत कर ली दुनिया वालों की!
आओ अब थोड़ी अपनी परवाह करें!
जो बातें दिल में दबी हैं अब तक अपने
आज हम उन बातों को दिल से जुबां पर लाएं
कुछ अपनी कहना कुछ मेरी भी सुनते जाना
हम दोनों के बीच तब न होगा रूठना मनाना।
अब मेरी न माने कोई बात यह दिल दीवाना
चलो चलते हैं वहाँ जहाँ तुम ही इसे समझाना
आज से बढ़कर न अच्छा कोई मुहूर्त होगा!
आज हम अपनी प्रीति को नया नाम देते हैं!
तुम्हारे मेरे नाम को एक नई पहचान देते हैं।

