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Amresh Kumar Labh

Abstract

4.4  

Amresh Kumar Labh

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हम नहीं देंगे साथ तुम्हारा

हम नहीं देंगे साथ तुम्हारा

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हम नहीं देंगे साथ तुम्हारा

मंदिर-मस्जिद के नारों पर

समझ चुके हैं तेरी सियासत

बहकेंगे नहीं अब चालों पर।


अमन – चैन के हम हैं पुजारी

शांति भंग नहीं होने देंगे

राष्ट्रहित ही सर्वोपरि है

नहीं विखंडित होने देंगे l

हम नहीं देंगे साथ तुमहारा l


साथ रहे हैं सदियों मिलकर

आए हो तुम भेद बताने

नफरत की दीवार खड़ी कर

सत्ता पाने या फिर बचाने।

हम नहीं देंगे साथ तुम्हारा!



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