STORYMIRROR

Amresh Kumar Labh

Abstract

3  

Amresh Kumar Labh

Abstract

हम नहीं देंगे साथ तुम्हारा

हम नहीं देंगे साथ तुम्हारा

1 min
524

हम नहीं देंगे साथ तुम्हारा

मंदिर-मस्जिद के नारों पर

समझ चुके हैं तेरी सियासत

बहकेंगे नहीं अब चालों पर।


अमन – चैन के हम हैं पुजारी

शांति भंग नहीं होने देंगे

राष्ट्रहित ही सर्वोपरि है

नहीं विखंडित होने देंगे l

हम नहीं देंगे साथ तुमहारा l


साथ रहे हैं सदियों मिलकर

आए हो तुम भेद बताने

नफरत की दीवार खड़ी कर

सत्ता पाने या फिर बचाने।

हम नहीं देंगे साथ तुम्हारा!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract