हम कुछ पक्का हुए
हम कुछ पक्का हुए
हुई लड़ाई हमारी तो अच्छा हुआ
कुछ तुम पक्का हुई कुछ मैं पक्का हुआ
तुम गई जो मुझे छोड़ कर राह में
कुछ मैं राहे चला कुछ मैं राहे बुना
जो बनाई थी तुमने इमारत कभी
उसमें कुछ ग़म रहा कुछ यादें रहा
जिन ख़्वाबों को तुमने सजाया कभी
उसमें था मैं जिया आज हूं मैं मरा
तुम कहानी बनी जब मेरी रात की
कुछ मैं लेखक बना कुछ मैं शायर बना
कुछ मैं तुमको लिखा कुछ मैं तुमको पढ़ा
कुछ मैं खुद ही हंसा कुछ मैं खुद ही रोया
सांसों में सांसों को अब उलझने भी दो
सच्ची झूठी रातों को सुनने भी दो
नजरें फेरो ना तुम आज मुझसे अभी
आंखों को आंखों से आज मिलने भी दो
हुई लड़ाई हमारी तो अच्छा हुआ
कुछ तुम पक्का हुई कुछ मैं पक्का हुआ

