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bhagawati vyas

Romance

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bhagawati vyas

Romance

" हिरणी सी मत डोल "

" हिरणी सी मत डोल "

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पुलक गात पर अरुणिम लाली ,

अधरों पर मधु बोल !

हँसी बिखेरे , आँगन में तू ,

हिंरणी सी मत डोल !!


नज़रें टिकी हुई हैं हम पर ,

दुनिया भर की ऐसी !

आँखों का काजल कह देगा ,

तेरी सब मदहोशी !

खुद को ज़रा बांध कर रख ले ,

बंध न सारे खोल !!


अभी सपन बाँधें हैं हमने ,

रंग नये भरना है !

समय सदा करता है कलकल ,

लहरों से डरना है !

खुशियाँ यहाँ ठहरती कम है ,

मिली सभी अनमोल !!


यहाँ गमकती पुरवाई है ,

और चमकती रातें !

दिन चुटकी में ऐसे बीतें ,

समझ नहीं कुछ पाते !

जो भी हासिल हो पाया है ,

करती रह तू तौल !!


साज , सिंगार , बांकपन तेरा ,

खूब कहर ढाता है !

बंजारिन आशाऐं हँसती ,

मन तब घबराता है !

जो भी पाया , वह बटोर लें ,

यहाँ खूब है झोल !!



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