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अरविन्द त्रिवेदी

Abstract

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अरविन्द त्रिवेदी

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हिन्दी दिवस

हिन्दी दिवस

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आओ हिन्दी दिवस मनाएँ ।

पश्चिमीकरण के त्याग दुशालें ।

अन्तर्मन को नित्य खँगालें ।

ए, बी, सी, डी, आज भुलाकर-

फिर से क,ख,ग,घ, को अपना-लें ।

हृदयों में सम्मान जगाकर,

बेल सभ्यता की फैलाएँ ।

आओ हिन्दी दिवस मनाएँ ।।

हिन्दी मात्र नहीं भाषा है ।

जन-जन की यह अभिलाषा है ।

गौरवमय इतिहास यही है -

भारत की यह परिभाषा है ।

विश्व पटल पर मिलकर इसको,

एक नई पहचान दिलाएँ ।

आओ हिन्दी दिवस मनाएँ ।।

जब मुखर मूकता होती है ।

तब बीज ज्ञान का बोती है ।

जीवन के हर अभिशापों को -

निज समरसता से धोती है ।

संस्कार की जननी हिन्दी,

आओ सब इसके गुण गाएँ ।

आओ हिन्दी दिवस मनाएँ ।।

      


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