STORYMIRROR

Mamta Singh Devaa

Inspirational

4  

Mamta Singh Devaa

Inspirational

" हिमालय से मेरे बाबू "

" हिमालय से मेरे बाबू "

2 mins
356

हम बचपन में सब बाते अम्माँ से मनवाते

अपनी दिल की सारी बातें उन्हीं से कह आते

अम्माँ हमेशा हमें मजबूत खंबे सी लगतीं

लेकिन अम्माँ के पीछे हम बाबू को खड़ा पाते ,

बाबू हमारे स्कूल नहीं कभी जाते थे

हमारे वार्षिकोत्सव में नहीं कभी आते थे

हमेशा आगे की पंक्ति में अम्माँ ही दिखती थीं

लेकिन अपनी सहमति के साथ उनको बाबू ही तो भेजते थे ,

हमें कभी कोई रोक - टोक सी नहीं थी

कभी कोई बंदी - पाबंदी भी नहीं थी

सारे बंद दरवाज़े अम्माँ ने ही खोला था

लेकिन दरवाज़े की सांकल बाबू ने ही तो गिराई थी ,


हम लड़कियाँ है इसका एहसास हुआ ही नहीं

लड़कों से अलग हैं ये एहसास छुआ भी नहीं

आधुनिकता का पाठ अम्माँ ही तो पढ़ाती थीं

लेकिन वो पाठ बाबू से ही तो पढ़ कर आती थीं ,

हम भाई - बहन जब लड़ते थे

नहीं हम - सब जब पढ़ते थे

तब अम्माँ ने ही तो ट्यूशन लगवाई थी

लेकिन ट्यूशन की बात उनको बाबू ने ही तो समझाई थी ,


उस उम्र में हम जो थोड़ी सी भी ग़लती करते थे

बड़ों की किसी बात को अनसुनी करते थे

अम्माँ अनुशासन की दीवार सी बन जाती थीं

लेकिन उस दीवार का गारा तो बाबू ही बनते थे ,

हम ज्यों - ज्यों बड़े होने लगे

तब त्यों - त्यों हम समझने लगे

हमारी अम्माँ तो एक माध्यम थीं

उस माध्यम का संबल तो थे मेरे बाबू

जो हमें हिमालय से लगने लगे ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational