Chetan Gondaliya
Classics
हे मानव !
हो प्रकाशमान, चल उठ,
चल नित-नवीन बन कर।
त्यज आलस, निज गति कर तू
प्रकाशवेगी गतिमान बन कर।
पार कर कष्ट भव-समंदर
जैसे महाबल - महामीन बन कर।
निवृत्त सेनान...
सबसे सच्चा और...
सफर जारी है.....
सूख लगे...
फ़ुरसत
समय बहरा होता...
जरूरी था...
सीख लो..
किये होंगे...
तुझमें तेरी होकर रहती, मैं तेरे भीतर की नारी हूँ। तुझमें तेरी होकर रहती, मैं तेरे भीतर की नारी हूँ।
ये सुनकर भी मुस्कुराती है और अपने बलबूते में घर को स्वर्ग वही बनाती है। ये सुनकर भी मुस्कुराती है और अपने बलबूते में घर को स्वर्ग वही बनाती है।
जीवन के हर पथ पर बेटी सौभाग्य तुम्हारा बना रहे। जीवन के हर पथ पर बेटी सौभाग्य तुम्हारा बना रहे।
संवेदना में सुलगता अंदर उबाल मिला "उड़ता"आते वक़्त में आगे काल मिला। संवेदना में सुलगता अंदर उबाल मिला "उड़ता"आते वक़्त में आगे काल मिला।
मां, ममता की मूर्ति, त्याग की मूर्ति होती है मां। मां, ममता की मूर्ति, त्याग की मूर्ति होती है मां।
नहीं बर्दाश्त होती मुझसे और ख़ामोशी आवारा, न सुन सकेगी तू, और न कहने की कोई वजह है। नहीं बर्दाश्त होती मुझसे और ख़ामोशी आवारा, न सुन सकेगी तू, और न कहने की कोई व...
माँ आरम्भ है माँ सृजन माँ को प्रतिपल नमन है। माँ आरम्भ है माँ सृजन माँ को प्रतिपल नमन है।
"आत्मा की आँखें " कैसे ना खुलेगी । पत्थर भी पानी हो जाता है। "आत्मा की आँखें " कैसे ना खुलेगी । पत्थर भी पानी हो जाता है।
तभी जान पाओगे क्या चाहती है तुम्हारी माँ तुमसे। तभी जान पाओगे क्या चाहती है तुम्हारी माँ तुमसे।
पल-पल तुझे सताया है अजनबी तुझे आज फिर घर याद आया है। पल-पल तुझे सताया है अजनबी तुझे आज फिर घर याद आया है।
अपने आप पर विश्वास कर अपना रास्ता अपने हाथ से लिख। अपने आप पर विश्वास कर अपना रास्ता अपने हाथ से लिख।
देशहित गर कुछ करना है शांतचित्त हो घर में रहो। देशहित गर कुछ करना है शांतचित्त हो घर में रहो।
तू मेरी हर्ष है माँ, तू ही सर्वस्व है माँ माँ तू ही सर्वस्व है। तू मेरी हर्ष है माँ, तू ही सर्वस्व है माँ माँ तू ही सर्वस्व है।
ज़रूरतें मेरी मुझे, हर लम्हा मारा करें कब तक ज़िंदा रख सकूँगा मैं ईमान को ज़रूरतें मेरी मुझे, हर लम्हा मारा करें कब तक ज़िंदा रख सकूँगा मैं ईमान को
मैं अभिलाषी, तू मृदु भाषी तेरा स्वर, मदमय, सुरभाषी, मैं अभिलाषी, तू मृदु भाषी तेरा स्वर, मदमय, सुरभाषी,
याद आती है मुझे भी माँ की दिन रात अब वो हक़ीक़त में कहां सपनो में आती है। याद आती है मुझे भी माँ की दिन रात अब वो हक़ीक़त में कहां सपनो में आती है।
मां तो आख़िरकार मां होती है ख़ुदा से कम वो कहां होती है। मां तो आख़िरकार मां होती है ख़ुदा से कम वो कहां होती है।
सेना ने यह संकल्प लिया सेना ने यह संकल्प लिया
सर पे छाया ही है माता-किरदार बहुत घनत्व^.( गहरा ) कवर है सर पे छाया ही है माता-किरदार बहुत घनत्व^.( गहरा ) कवर है
विनती हर जन्म बने मेरी माँ वह है माँ... विनती हर जन्म बने मेरी माँ वह है माँ...