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Dr Baman Chandra Dixit

Tragedy

4  

Dr Baman Chandra Dixit

Tragedy

हाल क्या

हाल क्या

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जब कोई अपना पूछता हाल क्या

रुक सा जाता हूँ जब, बोलता हाल क्या।।


बोलते, बोलने से तकलीफें कम होती

पिघलती दर्द जब, बोलता हाल क्या।।


छिपा रखा था जिह्वे यतन से नैन तले

छलक जाती हैं जब बोलता हाल क्या।।


झाँककर दर्दों को आँक लेते क्यों फ़िर

सिसकता दिल जब बोलता हाल क्या।।


ये दर्द ये आँसू हमसफ़र हर सफ़र का

बिफ़र पड़ते हैं जब, बोलता हाल क्या।।


पोछ लेने से आँसू ख़त्म हो जाते अगर

निशाँ न बिलखता जब बोलता हाल क्या।।

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