Sanjay Pathade Shesh
Drama
निभे तो रिश्ते
और ना निभें तो ये
सिर्फ रिश्ते
पराया धन
नहीं होती बेटियाँ
घर की लक्ष्मी
बनते दूल्हा
माता-पिता को भूला
अलग चूल्हा
सबकी नानी
एक लंबी कहानी
हिम नदी सी
सबकी दादी
ससुराल पीहर में
कहीं ना आजादी।
रेवड़ी
जनप्रतिनिधि
अजब दौर है
आदत
श्रद्धा बनाम ...
मोहरा
मोहरे
विश्वास
आश्वासन
हाइकू रचनायें
रात भर इक नज़र से थी नज़रें मिली पास आये मगर फासला रह गया रात भर इक नज़र से थी नज़रें मिली पास आये मगर फासला रह गया
जो कर रहे हैं उसका बहुत शुक्रिया मगर ऐसी भी कोई जान नहीं दे रहे हैं आप। जो कर रहे हैं उसका बहुत शुक्रिया मगर ऐसी भी कोई जान नहीं दे रहे हैं आप।
व्यवहारिक शिक्षा का फैलाया था, प्रकाश समाज से मिटाया था, छुआछूत अंधकार। व्यवहारिक शिक्षा का फैलाया था, प्रकाश समाज से मिटाया था, छुआछूत अंधकार।
बेजुबान प्राणी दगा न देते है, खुदा कसम वो, मनु से ज्यादा भरोसेमंद है, यकीनन। बेजुबान प्राणी दगा न देते है, खुदा कसम वो, मनु से ज्यादा भरोसेमंद है, यकीनन।
गुल्लक तोड़ निकाले हैं , कुछ सिक्कें हमने ख़्वाब के... गुल्लक तोड़ निकाले हैं , कुछ सिक्कें हमने ख़्वाब के...
जो अपने चरित्र पर रहता है, पक्का वो फिर लाखों में रोशन होता है, चेहरा जो अपने चरित्र पर रहता है, पक्का वो फिर लाखों में रोशन होता है, चेहरा
निज स्वार्थ सोगारथ व्यापार से, सत्य का आचरण लुटाता जता है ! निज स्वार्थ सोगारथ व्यापार से, सत्य का आचरण लुटाता जता है !
ऐसा होगा तो अच्छा होगा, नहीं चाह धरें इसकी यहां हम ! ऐसा होगा तो अच्छा होगा, नहीं चाह धरें इसकी यहां हम !
हम आवाज़ देते रह गए, तुम खोये ख़ुद में रह गए... हम आवाज़ देते रह गए, तुम खोये ख़ुद में रह गए...
संगमरमर की तेरी प्रतिमा बनाकर, तुझे इश्क की गजल मैं सुनाता हूँ। संगमरमर की तेरी प्रतिमा बनाकर, तुझे इश्क की गजल मैं सुनाता हूँ।
नहीं पा सका हैं धरम प्यार तेरा मिला गम तेरा तो सुक़ूँ पा रहा हैं। नहीं पा सका हैं धरम प्यार तेरा मिला गम तेरा तो सुक़ूँ पा रहा हैं।
दुनिया का हर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष राज़ आईने की तरफ साफ़-साफ़ दिखलाती सी दुनिया का हर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष राज़ आईने की तरफ साफ़-साफ़ दिखलाती सी
ज़िन्दगी की सारी लड़ाई सदा जीत जाते हैं हम! ज़िन्दगी की सारी लड़ाई सदा जीत जाते हैं हम!
तेरे मिलन की लगी है मुझे आस तू , मेरी मिलन की तड़प क्या जाने? तेरे मिलन की लगी है मुझे आस तू , मेरी मिलन की तड़प क्या जाने?
एक प्यास सी उठती है मन में वो बांसुरी मधुर सुनाए। एक प्यास सी उठती है मन में वो बांसुरी मधुर सुनाए।
कार्य पूर्ण की आकांक्षा में अंधकार में डूबा जाए।। कार्य पूर्ण की आकांक्षा में अंधकार में डूबा जाए।।
क्योंकि मैं औरत हूं चाहे कितनी शिक्षित दुनिया हो क्योंकि मैं औरत हूं चाहे कितनी शिक्षित दुनिया हो
ऐसे मानव से भला कहीं सांकल बंधा स्वान, ऐसे मानव से भला कहीं सांकल बंधा स्वान,
रातों को जगेगा, दिन में सपने सजायेगा, रातों को जगेगा, दिन में सपने सजायेगा,
सपनों का महल सजाया है मैंने, आ कर रोशनी फैला जाना, सपनों का महल सजाया है मैंने, आ कर रोशनी फैला जाना,