Sanjay Pathade Shesh
Tragedy
परम्परा अनुसार
पितरों की याद में
श्राद्ध पक्ष में
सभी जन
छप्पन भोग बनवाते हैं।
लेकिन घर में
होने वाली पार्टी,
शादी आदि में
यही वृद्धजन
भूखे ही सो जाते हैं।
रेवड़ी
जनप्रतिनिधि
अजब दौर है
आदत
श्रद्धा बनाम ...
मोहरा
मोहरे
विश्वास
आश्वासन
हाइकू रचनायें
इतना किया उनका मैने इंतजार कि उनकी गोद में सर रख मरने को तरसी। इतना किया उनका मैने इंतजार कि उनकी गोद में सर रख मरने को तरसी।
सर से लेकर पांव तक जन्नत हो तुम दिल यूंँ ही नहीं अपना तुझ पर आता चला गया। सर से लेकर पांव तक जन्नत हो तुम दिल यूंँ ही नहीं अपना तुझ पर आता चला गया।
दायजे की चिता में जलाते रहे नारि “उत्कर्ष” वो दीप बाती नहीं। दायजे की चिता में जलाते रहे नारि “उत्कर्ष” वो दीप बाती नहीं।
मैं केसे कह दूं दुनियां को मासूम, मैने जब भी देखा गिरगिट ही देखा है। मैं केसे कह दूं दुनियां को मासूम, मैने जब भी देखा गिरगिट ही देखा है।
छल फरेब खाती, जीवन की खोज में मंजिल की तलाश में वो लड़की. छल फरेब खाती, जीवन की खोज में मंजिल की तलाश में वो लड़की.
आज निकला मै घर से देख नजारा बाहर का हंस दिया। आज निकला मै घर से देख नजारा बाहर का हंस दिया।
मिलकर खाने वालों में छीनने की होड़ सी लग गई है। मिलकर खाने वालों में छीनने की होड़ सी लग गई है।
बस मैं तो ये ही जानती हूँ हर क्षण मेरे पापा ही मेरी जिंदगी हुआ करते थे। बस मैं तो ये ही जानती हूँ हर क्षण मेरे पापा ही मेरी जिंदगी हुआ करते थे।
ना मेरे शब्दों को तुमने समझा ना मौन मेरा तुम समझ पाए। ना मेरे शब्दों को तुमने समझा ना मौन मेरा तुम समझ पाए।
अब लकीरों का खेल शुरु हुआ, आड़ी टेढ़ी लकीरे खींच कुछ पढ़ा, अब लकीरों का खेल शुरु हुआ, आड़ी टेढ़ी लकीरे खींच कुछ पढ़ा,
बेशर्मी की दुनियां में चुल्लू भर पानी भी न मिला डूब मरने के लिए। बेशर्मी की दुनियां में चुल्लू भर पानी भी न मिला डूब मरने के लिए।
कुत्ते का भोंकना गली में अनजान आदमी का प्रवेश सावधान. कुत्ते का भोंकना गली में अनजान आदमी का प्रवेश सावधान.
चाहत भी कितनी अजीब है ना रूकती है ना थमती है। चाहत भी कितनी अजीब है ना रूकती है ना थमती है।
आखिर आप हमें किस आधार पर दो और दो चार सिखा रहे हैं। आखिर आप हमें किस आधार पर दो और दो चार सिखा रहे हैं।
नहीं आपको अपने मन मे उसे माफ़ करना है यही इस दर्द का निदान है नहीं आपको अपने मन मे उसे माफ़ करना है यही इस दर्द का निदान है
बंद दरवाजों से जो देख पाता कभी, वो राख होकर मिल जायेगा हर जगह। बंद दरवाजों से जो देख पाता कभी, वो राख होकर मिल जायेगा हर जगह।
कानून की मार, पेट की मार, गरीबी की मार खा खा कर मार हम गँवार हो गए। कानून की मार, पेट की मार, गरीबी की मार खा खा कर मार हम गँवार हो गए।
सोच में अवरोध क्यों है सांत्वना में क्रोध क्यों है। सोच में अवरोध क्यों है सांत्वना में क्रोध क्यों है।
अब गुर्दा, किडनी, आंखें, लहू बिकता है यही हिंदुस्तान है, क्या कम दिखता है। अब गुर्दा, किडनी, आंखें, लहू बिकता है यही हिंदुस्तान है, क्या कम दिखता है।
पूड़ियां कम खपें दमखम लगा दिया सारा कुकुर टोली करती रही चीत्कार। पूड़ियां कम खपें दमखम लगा दिया सारा कुकुर टोली करती रही चीत्कार।