गुस्सा/ शिकायत /परेशानी /जदॊजह
गुस्सा/ शिकायत /परेशानी /जदॊजह
गुस्सा/ शिकायत /परेशानी /जदॊजहद...
अब कुछ भी नहीं है दिल में मेरे.....
ऐसा भी नहीं कि समझौता
कर लिया हॊ मैंने
या फ़िर समर्पण.....
धीरे - धीरे ....
भूर्ण मे पलते बच्चॆ कि तरह ....
जो देखने को आतुर हो दुनिया
गला घोट कर मार डाला है....
अब शान्ति है....
अंदर ही अंदर .....
खुद से खुद को सान्तवना ....
हाँ अब यथार्थ में
शामिल हैं यह ....
अब मेरी कमजोरी या मजबुरी
नहीं हो तुम ....
ना ही मेरा आत्मबल
अब सिर्फ मै हूँ....
और धडकने इसका प्रमाण है.....
