STORYMIRROR

MANISHA JHA

Romance

3  

MANISHA JHA

Romance

गुलाबी इश्क

गुलाबी इश्क

1 min
177

इश्क़ वो गुलाब है

अगर सच्ची हो तो लाजवाब है

ये सुबह की आदाब है, शाम की शराब है

महफिल का शोर है, अँधेरे का भोर है

बेचैनी की भी चैन है, तन्हाई की ये मौन है

अमावस्या की पूर्णिमा है, मेरे लव की ना कोई सीमा है

ये दर्द का मसाज है, ये मर्ज बेइलाज है

ये कितना गहरा है, ये कितना संकरा है 

इसकी दरिया में डुबकी जब लगाओगे 

मेरा वादा है तुमसे, सीप के मोती ही पाओगे।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance