STORYMIRROR

MANISHA JHA

Romance

3  

MANISHA JHA

Romance

बेताब

बेताब

1 min
144

हम अपनी आदत से लाचार 

तेरे हर जख्म का मरहम ढूंढते हैं 

तेरे हर नाकाबिले बर्दाश्त गुस्ताखी को

हम बख्श देते हैं 

तू भी रहनुमा मेरा इस कदर 

मेरे एतबार को कुचल कर हर बार

जश्ने महफिल में नज़र आते हो

आँखों में शर्मिंदगी क्या, मुझे नीचा दिखाने

को बेताब रहते हो

कर लो मनमानी अपनी...सिर्फ तब तक

जब तक हम इस रिश्ते का सम्मान करते हैं


ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi poem from Romance