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MANISHA JHA

Abstract

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MANISHA JHA

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सपना

सपना

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सपना है

तुझे आगे बढ़ता हुआ देखूं ,हर ख्वाब पूरा हुआ देखूं

तेरी हर मुश्किलों को आसान करूँ

आज और कल की हर दुआ तेरे नाम करूँ

अख़बार की सुर्खियों में तुझे हर रोज मैं देखूं

पास हो या दूर तेरे ख्यालों से मुस्कुराऊँ

तेरी हर अदाओं पे इतराऊँ

तू भले ही भूल जाए, मैं तुझे स्नेह से गले लगाऊँ

तू गर मुझसे रूठे, तुझे मैं मनाऊँ 

तुझसे किया हर वादा मैं निभाऊं

इस जनम ना सही, अगले जनम ही तेरा प्रेम मैं पाऊँ

तेरी ख़ुशी को नजर ना लगे, आ तुझे काला टीका लगाऊं। 


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