गर् मैं वैज्ञानिक होती
गर् मैं वैज्ञानिक होती
यदि शोधकर्ता की सोच, मैं रखती।
विनाश नहीं!विकास में मन रमती।।
घटनाक्रम प्रेक्षण की आवृति ,गौर से करती।
चिंतन कर सम परिणामों की ,परख रखती।।
प्रेक्षण,चिंतन,मनन,विश्लेषण संश्लेषण करती।
अनुभवों के ज्ञान से फिर,नव खोज सोच रखती।।
आकस्मिक विपदाओं के,मूल में जाती।
वजह विपदाओं की मैं,ढूंढ कर लाती।।
निज ज्ञान को विश्व शान्ति हित में,प्रयोग में लाती।
जख्मी मानवता के जख्मों पर,मैं मरहम रखती।।
नित सृजन !रोजगार के,नव अवसरों का करती।
मानव समृद्धि व देशहित में,सबको प्रेरित करती।।
निज कौशल क्षमता के बल पर,पताका ज्ञान की फहराती।
बच्चे-बच्चे के मन में,वैज्ञानिक बनने की सोच जगाती।।
विशिष्ट उपलब्धियों से,विश्व जगत में नाम कमाती।
निज देश का विश्व भर में,परचम् ऊँचा लहराती।
