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Manjula Pandey

Abstract

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Manjula Pandey

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कब तक टकरायेंगे

कब तक टकरायेंगे

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दीवारों से आप कब तक टकरायेंगे ।

लहू-ए-जिगर से लथपथ हो जायेगें।।


खिलते नहीं शुष्क चट्टानों पर फूल कभी।

तो कैसे दीवारों में रास्ते बन जायेंगे।।


ताली दोनों हाथों की ताकत से है बजती ।

आप एक हाथ से ताली कैसे बजायेंगे ।।


सुना है !आग का दरिया जो पार कर जायेंगे।

वही हर हाल में मंजिल-ए- जीत को पायेंगें ।।


सोच कर यही अब आगे कदम बढ़ते जायेंगे।

धैर्य,संयम, बुद्धि से ही जीवन नैय्या खै पायेंगे।।




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