STORYMIRROR

अमित प्रेमशंकर

Inspirational

4  

अमित प्रेमशंकर

Inspirational

रे मितवा दिल ना किसी से लगाना

रे मितवा दिल ना किसी से लगाना

1 min
372

रे मितवा दिल ना किसी से लगाना

रो लेना तुम छुप के अकेले 

जख्म उसे ना बताना

रे मितवा दिल ना किसी से लगाना।।


खुद से मोहब्बत कर लेना तुम

खुद की हिफाज़त कर लेना तुम 

दिल शीशा है दिल शबनम है

पत्थर है ये जमाना

रे मितवा दिल ना किसी से लगाना


पूछो टूटे हैं घर जिनके

कैसे बिताये दिन गिन गिन के

ना ये मंज़िल हम राही का

ना ये अपना ठिकाना

रे मितवा दिल ना किसी से लगाना।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational