STORYMIRROR

Sandeep Firozabadi

Classics

2  

Sandeep Firozabadi

Classics

गलतफ़हमी

गलतफ़हमी

1 min
689


इतराता था मैं कि चाहने वाले बहुत हैं मेरे,

एक काफ़िला साथ है मेरे,

बुरे वक़्त ने गलतफ़हमी दूर कर दी मेरी,

बस बेचैनी, बेबसी और मायूसी हाथ है मेरे|


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics