ग़ज़ल-रात भर ख्वाब ही न जाते हैं
ग़ज़ल-रात भर ख्वाब ही न जाते हैं
ग़ज़ल
*रात भर ख्वाब ही न जाते हैं, ख्वाब में तुम हमें सताते हो।*
*याद आती मगर न जाती है, रात भर करवटें दिलाते हो।*
*एक पल का सुकून मिलता तो हम उसे रात भर सजा लेते,*
*शबनमी बूंद बन जलाती तन,आग हम जिस्म की बुझाते हैं ।*
*हौसले टूट के जुड़ें कैसे, फासले ही न मिट सके अब तक,*
*जोड़ लो दो बदन की हर ख्वाहिश,हम तुम्हें हौसले दिलाते हैं।*
*धूल मे फूल मिल रहा मेरा ,छाॅंव अपनी इसे जरा दे दो,*
*मै नदी तुम बनो समंदर तो आज मिलके अगन बुझाते हैं।*
*अज्म हर एक आज हम अपने वार देंगे सनम मुहब्बत में,*
*ज़िंदगी मान के तुम्हें अपनी अश्क हम रात भर बहाते हैं।*
*तुम सलामत रहो दुआ करते रात भर आह भी भरा करते,*
*चाहते हैं तुम्हें दिलो जां से इसलिए उल्फतें निभाते हैं।*
मीनाक्षी किलावत (अनुभूति).........

