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दिनेश कुशभुवनपुरी

Abstract Inspirational

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दिनेश कुशभुवनपुरी

Abstract Inspirational

गीत- जीवन उठा लिए अँगड़ाई

गीत- जीवन उठा लिए अँगड़ाई

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जीवन उठा लिए अँगड़ाई,

जब आयी प्रातः की बेला।

पुलकित हुए धरा के प्राणी

देख देख मौसम अलबेला॥

तोड़ हौसला विभावरी का,

प्रकट हुआ दमदार दिवाकर।

सावन को आते जब देखा

इठलाकर चल पड़ा धरा धर।

रिमझिम बूंदों के आने से

गर्मी भागी गात छुपाकर।

चिढ़कर बोली फिर आऊँगी,

अंगारे बरसाने तुम पर॥

शांति चित्त हो देख रही थी

वसुधा ईश्वर का हर खेला।

जीवन उठा लिए अँगड़ाई,

आयी जब प्रातः की बेला॥

महक बिखेरा मिल पुष्पों ने,

देख चमन की हरियाली को।

मंद मंद मुस्कायीं कलियाँ,

देख भ्रमर की खुशहाली को।

काँटे भी फिर लगे नाचने,

देख प्रफुल्लित वनमाली को।

गमले भी मदहोश हो गये,

देख पादपों की लाली को॥

शीतलता भी साथ चल पड़ी,

देख पवन पानी का रेला।

जीवन उठा लिए अँगड़ाई,

आयी जब प्रातः की बेला॥

कोयल को जब गाते देखा,

गौरैया भी लगी चहकने।

बरखा को सँग पाकर दादुर,

टर्र टर्र कर लगे मटकने।

मौसम हुआ सुहाना ऐसे

पशु पंछी सब लगे थिरकने।

पा आनंदित सब जीवों को,

वसुधा प्यारी लगी महकने॥

सुखमय हों सब जीव चराचर,

लगा रहे खुशियों का मेला।

जीवन उठा लिए अँगड़ाई,

आयी जब प्रातः की बेला॥



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