गीत - जान ए जिगर |
गीत - जान ए जिगर |
तेरी नजर का करम मुझपर अगर हो जाये
मिल जाये साथ तेरा आसान सफर हो जाये
लहराकर तेरी जुलफ़े हवाओ जब बलखाती है
सच कहूँ बिन मौसम सावन असर हो जाये
तेरे नजरो का तीर दिल पर जब लगते हैं
मेरे सनम अब मेरी जान पर कहर हो जाए
देख तेरे होठो की मुस्कान घायल हम हुये
तुम नगमो के गीत हर लब्ज बहर हो जाये
तेरी कातिल अदाए गिराती दिल पर बिजलियाँ
चलो न चाल मचल जख्मी शहर हो जाये
आया है झूम के हुशनों शबाब तुझपर बहुत
दीवाना कही तेरा हर गाँव न नगर हो जाये
मल्लिकाए हुश्न कहूँ या अफ़सराए जन्नत तुझे
हो जाऊं जान निसार गर मुझपर नजर हो जाये
गोरा रंग कातिल काला तिल भी तेरा कातिल
झूम आओ बांहों तू मेरी जाने जिगर हो जाये।

