घुटन
घुटन
जब वक्त मुश्किल होता है,आसान नहीं है साँस लेना
घुटे - घुटे से होते हैं लम्हे,धीमी हो जाती हैं चाल
खामोशी छा जाती है लबों पे.. जब कोई करे सवाल
कैसे समझाऊं सबको किसने किया मुझे बेहाल।
गुजर जाएगा ये वक्त भी, पता नहीं.. लगेंगे कितने साल
जी करता है, कोई तो हो अपना.. जो ले हमें संभाल
अब सहा नहीं जाता, तन्हाईयाँ काटने लगी हैं
चुभते हैं ये दिन.. ये रात...आखिर क्यों।
इतनी परीक्षाएं होती हैं मेरी, उब गई हूँ मैं
इन तमाम आजमाईशों से कब तक गुजरना पड़ेगा
खता इतनी हो गई कि.. सजा कम नहीं हो रही
नाउम्मीदी ने जहन में अब घर बसा लिया है।
परवाह किसी को नहीं ये हो क्या रहा है
रहम कर ये खुदा... कि हम भी तेरे मासूम बच्चे हैं
बक्श दे अब कि.. गम नाकाबिले बर्दाश्त हो गए हैं
एक चिराग सा जला इस दिल में,खुशियों की बारिश कर दे।
समाँ ये बदले.. ये वक़्त मुझे पे मेहरबान हो जाए
एक तू ही तो है.. जिस पे आस लगाए सिसकियों
में भी बस अब जिए जा रहे हैं, साँस लिए जा रहे हैं।
