STORYMIRROR

कवि धरम सिंह मालवीय

Romance

4  

कवि धरम सिंह मालवीय

Romance

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
207

एक हवा का झोंका लगा था अभी

तेरी चूनर भी सर से सरकने लगी


मैने चुपके से छत पर बुलाया तुझे 

तेरी पायल निगोड़ी छनकने लगी


हाथ तेरा जो थामा था मेरे हाथ में 

तेरी चूड़ी खन खन खनकने लगी


मैं जब तक दिखाता चाँद तारे उसे

बिंदिया तारों के जैसे चमकने लगी 


सोचा आगोश में आज भर लूँ तुझे

मेरी आँख अब क्यो फड़कने लगी


दोनों हाथों से मैंने जो थामा तुझे

तेरी कम्मर सज़र सी लचकने लगी


तुझको कहना तो चाहा प्यार के बोल तीन

पर न जाने ज़ुबा क्यों अटकने लगी


हुश्न और य इश्क मुज़स्मा देखकर

मेरी नजरे क्यो ही अब भटकने लगी


तेरी इबादत जो कि नाम तेरा लिया

तेरी रहमतें मुझ पर बरसने लगीं!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance