STORYMIRROR

Shubham Pandey gagan

Romance

3  

Shubham Pandey gagan

Romance

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
225

हमें पूछो बड़ा मुश्किल है गैरों से मिले जाना

सभी रातों में तेरे ग़म में मेरा यूँ ही जले जाना।


सितारों से घिरा है तो न जाने क्यों अकेला है

बिना सूरज के जैसे हो कलियों का खिले जाना।


अधूरा हूँ मग़र जाना तुम्हें पूरा मैं कर दूँगा

उम्र भर हो सके तो संग हमारे ही चले जाना।


मिले हो तुम मुझे अब तो मुद्दतों की दूरी पर

अभी भी हो न जाने क्यों लबों को तुम सिले जाना।


मुश्किल है गगन का अब बिना तेरे जिये जाना

घटे है ये सनम ऐसे बर्फ का हो गले जाना।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance